भारतीय त्यौहार चित्र चार्ट नरक चतुर्दशी 2019
नरक चतुर्दशी (काली चौदस, रूप चौदस, छोटी दीवाली या नरक निवारण चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है) ए हिंदू त्योहार है, जो हिंदू कैलेंडर अश्विन महीने की विक्रम संवत्में और कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (चौदहवें दिन) पर होती है। यह दीपावली के पांच दिवसीय महोत्सव का दूसरा दिन है। हिन्दू साहित्य बताते हैं कि असुर (राक्षस) नरकासुर का वध कृष्ण, सत्यभामा और काली द्वारा इस दिन पर हुआ था। यह दिन सुबहधार्मिक अनुष्ठान, उत्सव और उल्हास के साथ मनाया जाता है। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। उसी की खुशी में दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीएं जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा। शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है
भारतीय त्यौहार चित्र चार्ट नरक चतुर्दशी 2019
काली चौदस और दीपावली की रात जप-तप के लिए बहुत उत्तम मुहूर्त माना गया है। नरक चतुर्दशी की रात्रि में मंत्रजप करने से मंत्र सिद्ध होता है।इस रात्रि में सरसों के तेल अथवा घी के दीये से काजल बनाना चाहिए। इस काजल को आँखों में आँजने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती तथा आँखों का तेज बढ़ता है। नरक चतुर्दशी (काली चौदस, रूप चौदस, छोटी दीवाली या नरक निवारण चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है) ए हिंदू त्योहार है, जो हिंदू कैलेंडर अश्विन महीने की विक्रम संवत्में और कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (चौदहवें दिन) पर होती है। यह त्यौहार {महापर्व दिवाली} के एक दिन पहले मनाया जाता हैं. इसे नरक से मुक्ति पाने वाला त्यौहार कहते हैं. इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता हैं. इसे रूप चौदस एवम छोटी दिवाली भी कहते हैं
भारतीय त्यौहार चित्र चार्ट नरक चतुर्दशी 2019
उनकी सभी चेष्टाएं सुनकर भगवान श्री कृष्ण गरुड़ पर सवार होकर नरकासुर की नगरी में आए। वहां उन्होंने सभी राक्षसों का वध करके पांचजन्य शंख बजाया तो नरकासुर दिव्य रथ पर सवार होकर भगवान के पास आ गया और भगवान से युद्ध करने लगा। घमासान युद्ध हुआ तथा भगवान ने उसकी छाती पर जब दिव्य शस्त्र से प्रहार किया तो नरकासुर धरती पर गिर पड़ा।
भूमि की प्रार्थना पर भगवान श्री कृष्ण नरकासुर के निकट गए तथा उसे वर मांगने को कहा। नरकासुर ने कहा कि जो मनुष्य मेरी मृत्यु के दिन मांगलिक स्नान करेगा उसे कभी नरक यातना नहीं मिलेगी।भारतीय त्यौहार चित्र चार्ट नरक चतुर्दशी 2019
इससे दो कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा नरकासुर की है। नरकासुर का अंत वासुदेव नंदन भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। शिवपुराण में इसी नरकासुर का अंत कार्तिकेय जी ने किया था। दोनों ही कथाओं में नरकासुर ने ब्रह्मा जी से कभी मृत्यु न होने का वरदान मांग लिया था। दूसरी कथा रंती देव नामक राजा से जुड़ी है। रंती ने कभी पाप नहीं किया, लेकिन यमराज आ गए। यमराज बोले, एक बार तुमने एक धर्मात्मा को अपने द्वार से लौटा दिया था। कालांतर में, रंती ने एक साल की मोहलत लेकर अपने जीवन को पापमुक्त किया
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